अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


शुभ दीपावली

अनुभूति पर दीपावली कविताओं की तीसरा संग्रह
पहला संग्रह
ज्योति पर्व
दूसरा संग्रह दिए जलाओ

दीवाली हाइकु

मन के दीये
जलते रहें सब
खुशियाँ लिये।

नेह चिराग
जलाकर रखना
घर-घर में।

मिटा डालेंगी
उजियारे की साँसें
निष्ठुर तम।

तम है हारा
दीये संग लडाई
झूमे उजाला।

जुगनू से हैं
झिलमिलाते दीये
पलों को जिये।

मिटाना होगा
पसरा अँधियारा
आशा दीयों से।

लड़ रहे हैं
उजाला व अँधेरा
जीतेगा कौन?

होती आई है
सच्चाई की ही जीत
बुराई पर।

छिपती फिरे
दीयों की रोशनी से
अमा बेचारी।

दुख हराएँ
ये चांदनी से दीये
सुख फैलाएँ।

-डॉ. भावना कुंअर
1 नवंबर 2007

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।