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अनुभूति में कीर्ति चौधरी की रचनाएँ-

कविताओं में-
आगत का स्वागत
कंपनी बाग
केवल एक बात थी
बरसते हैं मेघ झर-झर
मुझे फिर से लुभाया
वक़्त
 

 

केवल एक बात थी

कितनी आवृत्ति
विविध रूप में करके तुमसे कही
फिर भी हर क्षण
कह लेने के बाद
कहीं कुछ रह जाने की पीड़ा बहुत सही

उमग-उमग भावों की
सरिता यों अनचाहे
शब्द-कूल से परे सदा ही बही

सागर मेरे! फिर भी
इसकी सीमा-परिणति
सदा तुम्हीं ने भुज भर गही, गही।

२३ जून २००८

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