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क्षणिकाओं में—
दस क्षणिकाएँ

गीतों में—
आ भाई सूरज
इस बस्ती मे
उजियारे के जीवन में

उम्र की चादर की
कहाँ गए
धूप की चादर
धूप ने
उदास छाँव
आसीस अंजुरी भर
लेटी है माँ

संकलन में—
नई भोर
नया उजाला

 

आ भाई सूरज

आ भाई सूरज
उतर धरा पर
ले आ गाड़ी
भरकर धूप ।

आ भाई सूरज
बैठ बगल में
तापें हाथ
दमके रूप।

आ भाई सूरज;-
कोहरा अकड़े
तन को जकड़े
थके अलाव।

आ भाई सूरज
चुपके-चुपके
छोड़ लिहाफ़
अपने गाँव ।

24 जून 2007

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